एक सपने का टूटना -----सुशील शर्मा

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एक सपने का टूटना -----सुशील शर्मा

Post by admin » Wed Jul 11, 2018 3:24 pm

Sushil Sharma

Jul 10 (1 day ago)


एक सपने का टूटना
सुशील शर्मा

एक सपना
जो ऊगा था
गहरे अंतस में।
सूर्य की ,भोर किरण सा।
गहनतम अँधेरे में
जुगनू सा ,
जीवन के तुमुलनाद में
मधुरम स्वर सा।
एक सपना !
जो उषा की अरुणाली में ,
भोर का तारा सा।
जो तुम्हारे और मेरे
गर्भनाल से जुड़ा था।
तुम्हारे संदली ,चम्पई ,
अस्तित्व के वनिबस्त।
ले रहा था शिशु आकार।
एक सपना !
जो जुड़ा था।
कल्पना के पंखों से !
तुम्हारे अपने होने के दंभ से !
संबंधों के स्तम्भ से !
न जाने क्यों रूठ गया !
निर्मम झंझा झोकों में
गर्भनाल में फूट गया।
एक सपना
शिशु बनने से पहले ही
टूट गया।
एक सपना जो ऊगा था
तेरे और मेरे गर्भनाल में।
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