ज़रा गौर कीजिये -- एक सच..... Kavi Deepak Sharma

Post Reply
User avatar
admin
Site Admin
Posts: 21467
Joined: Wed Nov 16, 2011 9:23 am
Contact:

ज़रा गौर कीजिये -- एक सच..... Kavi Deepak Sharma

Post by admin » Fri Jan 11, 2013 4:25 pm

नारी प्रकृति की मानव समाज को ईश्वर द्वारा बख्शी गई सबसे श्रेष्ठ एवम अतुलनीय मानस कृति है.नारी सम्पूर्ण कायनात है .अपने आप में एक सम्पूर्ण संसार है .नारी ने इस संसार को जिसके हम अंश हैं , जन्मा है.यह सब कुछ जो भी यहाँ मानवीय या दैवीय अथवा किसी भी रूप में बिद्यमान है,इसका परोक्ष रूप से नारी का ही दिया हुआ आशीर्वाद है .हम इस ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकते और न ही होना चाहते हैं . ये हमारा ही दुर्भाग्य है कि हम जिस कोख से पैदा होते हैं उसी को दुत्कारते हैं .उसी को उसका हक नहीं देते .हम नारी से उम्मीद तो करते है पर उसकी उम्मीद नहीं बनते . भारत एक पुरुष समाज देश है और अन्य पुरुष प्रधान देशों कि तरह ही यहाँ भी पुरुष अपने झूठे अहंकार को दबा नहीं पाता पर भारत ही वो देश है जहाँ पर प्रथम महिला साम्राजी रज़िया सुल्ताना ने विश्व को अपनी शक्ति का एहसास करवाया था और अपनी बौद्धिक कुशलता से इस पुरुष समाज को कायल कर दिया था .परन्तु इस कड़ी को आगे नहीं बढ़ने दिया गया और यह हकीक़त भी एक दास्ताँ हो गई.उस दौर में भी सोच में बदलाब लाना ज़रूरी था पर अफ़सोस कुछ हो न सका.
आज हम बहुत बड़ी -बड़ी बातें करते हैं कि नारी को यह कर देंगे ,नारी के लिए वो कर देंगे ....महिलाओं को आरक्षण देंगे ..सरकारी नौकरी में सहभागिता देंगे ...उच्च शिक्षा के लिए प्राथमिकता देंगे पर सब कोरे के कोरे वायदे हैं .मैं ख़ुद निजी तौर पर ये मानता हूँ ही अभी भी करनी और करनी में ज़मीं आसमान का फर्क है. जुबान कुछ और कहती है पर दिल कुछ और कहता है .जब तक जुबान का कहा हुआ दिल नहीं बोलेगा तब तक बदलाब नहीं आ सकता .
आज भी स्तिथि कुछ ज्यादा उन्नत नहीं है वो ही जो सदियों पहले थी. महिला का काम रोटी बनाना ,घर का काम करना ,आदमी को देहसुख देना और फिर बच्चे पैदा करके अपना सब कुछ भुला देना और बुदापे का इन्तिज़ार करके मर जाना बस इतनी सी ही जिंदगी है नारी कि .यह ही जीवन चक्र है .क्या समाज कभी यह चाहेगा कि नारी इस समाज को अपनी बौद्धिक शक्ति से भी नवाजे .जिस दिन समाज ने यह मन से चाह लिया न ,उसी दिन से समाज में एक नई किरण का,एक नई क्रांति का,एक नई सोच का जन्म हो जाएगा और फिर कुछ सालों में हमे महिला दिवस मनाने की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी .
वैसे भी नारी की बात करते ही हम पुरुषों के जेहन में तुलसीदास जी की चौपाई याद आती है और हम मुह दबाकर हंस देते हैं.पर हमने चाणक्य जी के उस श्लोक पर कभी गौर नहीं किया जिन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था की "महिलाओं में आदमी से हर कार्य में पुरुषों से ज़यादा क्षमता होती हैं चाहें वो शारीरिक हो या बौद्धिक या मानसिक.
वैसे भी अगर प्रबंधन की दुनिया में देखा जाए तो महिला ही इस कायनात की पहली प्रबंधक है जिसने घर से लेकर समाज तक को एक दायरे में बाँधा हुआ है.घर की रसोई से लेकर शादी -बारात या किसी भी अवसर या रिश्तों के प्रबंधन का सबक महिलाओं ने ही इस विश्व को दिया है .और तो और अगर हम कहें के पुरुष का भी सही प्रबंधन नारी ने ही किया हुआ हैं वरना पुरुष से ज़्यादा कोई भी अस्त-व्यस्त प्राणी इस धरती पर नहीं .पर आज हमे ज़रुरत है की हम इस ज़रुरत को खुल कर स्वीकार करेँ और महिलाओं को अपने साथ गर्व से सहभागिता दें ,उनका सम्मान करेँ ,उनका आशीर्वाद लें,
धरती पर जितने फुहार पड़ेगी ,खेत उतने ही लहलहाएंगे .खलियान उतने ही भरेंगे ,घर में उतनी है खुशहाली होगी .घर खुशहाल तो समाज खुशहाल .समाज खुशहाल तो देश खुशहाल और देश खुशहाल तो विश्व खुशहाल.
पर हालत कुछ और ही हैं.......

कितनी बेबस है नारी जहां में
न हंस पाती है, न रो पाती है
औरों की खुशी और गम में
बस उसकी उमर कट जाती है

नारी से बना है जग सारा
नारी से बने हैं तुम और हम
नारी ने हमें जीवन देकर
हमसे पाए अश्रु अपरम
इन अश्रु का ही आंचल पकड़े
बस उसकी उमर कट जाती है

नारी का अस्तित्व देखो तो ज़रा
कितना मृदु स्नेह छलकाता है
कभी चांदनी बन नभ करे शोभित
कभी मेघों सी ममता बरसाता है
कुछ दी हुई उपेक्षित श्वासों में
बस उसकी उमर कट जाती है

सदियों को पलटकर देखो तो
हर सदी ने यही दोहराया है
नारी को जी भर लूटा है
नारी को खूब सताया है

इस विश्व में स्वयं को तुम
अगर मानव कहलवाना चाहते हो
नारी को पूजो , पूजो नारी को
जो फिर जीवन पाना चाहते हो।
कवि दीपक शर्मा
सर्वाधिकार @कवि दीपक शर्मा
http://www.kavideepaksharma.com
+91 9971693131
186,2nd floor,sector-5,Vaishali Ghaziabad-201010
Attachments
naari.JPG
naari.JPG (153.69 KiB) Viewed 2690 times
Image
Mail your articles to swargvibha@gmail.com or swargvibha@ymail.com

Post Reply