लम्हा-लम्हा पढ़ लिया एक कहानी की तरह---अमरेश सिंह भदौरिया

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लम्हा-लम्हा पढ़ लिया एक कहानी की तरह---अमरेश सिंह भदौरिया

Post by admin » Tue Sep 25, 2018 10:26 am

मुक्तक
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Amresh Singh



लम्हा-लम्हा पढ़ लिया एक कहानी की तरह।
रख लिया दिल में उसे एक निशानी की तरह।
सुनहरी धूप के झरने-सा सहज दिन हो गया,
यादें बनी हैं सुरमयी-सी शाम सुहानी की तरह।
अमरेश सिंह भदौरिया
Amresh Singh

7:38 AM (2 hours ago)



सोच भी सयानी है और सयाने हैं लोग।
कहने को तो सब जाने-पहचाने हैं लोग।
फ़ितरत क्या बदली इधर जरा-सी हवा की,
कल तक जो अपने थे आज बेगाने हैं लोग।
अमरेश सिंह भदौरिया
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