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विनती सुन लो किशन मुरारी-----दीपक शर्मा

Posted: Wed Sep 05, 2018 3:10 pm
by admin
Deepak Sharma

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विनती सुन लो किशन मुरारी ।
हर लो विपदा सभी हमारी ।
नेह्धारा से नस नस सींचो ।
महका दो जीवन फुलवारी ।।

कण कण में तुम बसते भगवन।
निशिदिन भजता तुमको ये मन।
तुमरे नेह से मेरा गुँजन जीवन ।
जी नहीं सकते कृष्णा तुम बिन ।
तुम संसारी होकर भी वैरागी ।
हम बैरागी होकर भी संसारी ।।

ना वृन्दावन में भले जगह दो ।
मथुरा, गोकुल से भी भगा दो ।
जो भी चाहें हमको सजा दो ।
पर अपने चरणों में बिठा दो ।
खाकर नित ठोकर तुम्हारी।
वैतरणी तर जायेगी हमारी।।

माखन खवैया कुछ तो बोलो ।
कमलअधर मुखारविंद खोलो ।
यूँ चुप रहकर न भक्ति तोलो ।
इस बेरस में कुछ तो रस घोलो ।
"दीपक"में भरो नूतन चिन्गारी ।
विनती सुनो मेरे ब्रज बिहारी ।।
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गोविन्द बोलो सब गोपाल बोलो ।
राधा रमण प्रभु जगपाल बोलो ।
गोविन्द बोलो सब गोपाल बोलो ।
राधा रमण प्रभु जगपाल बोलो ।।

@ दीपक शर्मा
http://www.kavideepaksharma.com