मुसाफिर का मन---शालू मिश्रा

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मुसाफिर का मन---शालू मिश्रा

Post by admin » Tue Sep 25, 2018 10:59 am

Shalu Mishra

AttachmentsMon, Sep 24, 2:45 PM (20 hours ago)

to me


(कविता)

(मुसाफिर का मन)

मन ये तेरा
परेशान क्यूँ है,
इस जग से
बेफिक्र क्यूँ है,
नित नये ख्वाब
सजा कर
मन में दबा
बैठा क्यूँ है।
पथ पर नित
आगे बढ चल
न चंद कांटो से
तू डर,
मुसीबतों को चीर
तू देख,
बिन अंधकार
चमकता सितारा
भी नही है।

ए मुसाफिर
तूँ रूकता क्यूँ है।
तू रूकता क्यूँ है।

शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ)
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