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Aurat---A Ghazal By Deepak Sharma

Posted: Fri Jan 11, 2013 4:26 pm
by admin
उमर के साथ साथ किरदार बदलता रहा
शख्सियत औरत रही बस प्यार बदलता रहा .

बेटी ,बहिन ,बीबी , माँ , ना जाने क्या - क्या
औरत का चेहरा दहर हर बार बदलता रहा .

हालात ख्वादिनों के न सदी कोई बदल पाई
बस सदियाँ गुज़रती रहीं ,संसार बदलता रहा .

प्यार ,चाहत ,इश्क ,राहत ,माशूक और हयात
मायने एक ही रहे ,मर्द इज़हार बदलता रहा .

किसी का बार कोई इंसान नहीं उठा सकता यहाँ
पर कोंख में पलकर ज़िस्म आकार बदलता रहा .

सियासत ,बज़ारत,तिज़ारत या फिर कभी हुकूमत
औरत बिकती रही चुपचाप , बाज़ार बदलता रहा .

कब तलक बातों से दिल बहलाओगे तुम "दीपक ”
करार कोई दे ना सका बस करार बदलता रहा
कवि दीपक शर्मा