रिश्तों में जब शर्तों के धागों में दम खो जाये--संचिता लाहिरी

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रिश्तों में जब शर्तों के धागों में दम खो जाये--संचिता लाहिरी

Post by admin » Tue Jul 03, 2018 4:14 pm

शायरी -25


1 ) रिश्तों में जब शर्तों के धागों में दम खो जाये

आपसी विश्वास का जब वजूद खो जाये

गम क्या अगर एक दूसरे से अनजान से ही रह जाये।


2 ) शिकायतें अगर ज़बान पे आ जाये तोह नादान है

जब शिकायतें बेज़ुबान हो जाये तब नासूर है।



3 ) कदम चल रहे है

गिरकर संभलना सीख रहे है

तजुर्बे इसी बहाने बन रहे है।




4 ) खामोशियाँ ही बेहतर है

शब्दों से अक्सर दिल टूटते है




5 ) ख्वाबों को पंख दे कर उड़ने दे

वक़्त के साथ ख्वाबों को साकार करने का हुनर सीख ले

ध्यान इतना रहे की ज़मीन पर पाओ टीके रहे



Written By Sanchita
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