रे मन ---- सुशील शर्मा

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रे मन ---- सुशील शर्मा

Post by admin » Tue Jul 03, 2018 4:20 pm

Sushil Sharma May 31
नशे पर क्षणिकाएं (आज तम्बाखू निषेध दिवस है) सुशील शर्मा तम्बाखू ने अपना रंग द...
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Sushil Sharma Jul 1 (2 days ago)
डाक्टर और भगवान (डाक्टर डे पर सभी डॉक्टर्स को समर्पित ) डॉक्टर ! एक आस भगवान ...
Sushil Sharma

11:28 AM (4 hours ago)

to me
रे मन
सुशील शर्मा

नेह के अंत:स्वर
जीवन से बतियाते
मैं निर्विकल्प
धूलभरे शिशु सा
अनुरक्त

पैरों में बहती समय नदी
विजन की धूल में लिप्त
भरे मेघ सा
तुम्हारे स्नेह
का पहला डोंगरा
तृप्तिमय।

व्यथा के तम में
सर्जना के क्षण
संदर्भ के मधु-कोष
से कटा सत्य
अनदेखे
नीरव गहरे इशारे
संवेदना के उन्मेष
आद्र असह्य
दर्द के सहारे
जीवित सा।
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