आज का साहित्यकार है तंग (क्षणिकाएं )---Sukhmangal Singh

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आज का साहित्यकार है तंग (क्षणिकाएं )---Sukhmangal Singh

Post by admin » Sat Mar 10, 2018 7:11 pm

१ आज का साहित्यकार है तंग
नवगीत का मूलस्वर है व्यंग |
नेताओं की चारो तरफ चांदी वंद
अफसर के घर बरसती आंधी नवरंग ||

२- देश ने अभी तक चप्पल नहीं मारा
गागर नेताओं को चप्पल ने ही संवारा |
चप्पल की चाल को समझिये जनाब
जिसको पड़ी है वही आज देशको दुलारा ||
३- बैंक का मैनेजर बोला
मेहुल जी लों थोड़ा ले लीजिये
कारण इ एम् आई कम हो गई
मेहुल तो ताक में पहले से थे
बोले साहब बारह करोड़ दे दीजिये
आगे-पीछे सभी हिसाब हो जाएगा
वंदा फिर जब कभी लौट कर आयेगा
इसको देश और तू चुकाएगा ||


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Sukhmangal Singh
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