क्षणिकाएं -----सुशील शर्मा

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क्षणिकाएं -----सुशील शर्मा

Post by admin » Sun Mar 04, 2018 3:57 pm

क्षणिकाएं

सुशील शर्मा

मेरा स्कूल
सदियों से खड़ा
निर्लिप्त सा
बूढ़ा बड़ा।

मेरे दोस्त
कुछ दगाबाज
लेकिन
मेरे अपने

मेरी बीबी
सबकी दीदी

मेरा घर
माँ के गहने
पिता का पसीना
भाई का बचपन
मेरा नगीना।

मेरी बेटियां
नदियों सी बहती
मेरे अस्तित्व की
उजली चोटियां।

मेरे बेटे
दूर से चमकते
सुनहरे तारे।

मेरी माँ
मेरे दुख में सालती
आज भी
मुस्कुरा कर मुझे
सम्हालती।

मेरे पिता
न्यायाधीश
गलतियों पर सजा
कष्ट में
बरगद की छांव

मेरा भाई
मेरा अस्तित्व
जीवन संघर्ष से
निखरा व्यक्तित्व

मेरा गांव
ओशो का दर्शन
भारतीय संस्कृति का
अमूर्त दर्शन

सुशील शर्मा
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