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Tue Dec 04, 2018 10:32 am
Forum: press news
Topic: 'मैं हिन्दू क्यों हूँ' का लोकार्पण--डॉ. शशि थरूर
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'मैं हिन्दू क्यों हूँ' का लोकार्पण--डॉ. शशि थरूर

वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. शशि थरूर की विचारोत्तेजक किताब 'मैं हिन्दू क्यों हूँ' का लोकार्पण आज 2 दिसम्बर के सायंकाल उनकी उपस्थिति में देश के प्रख्यात विद्वान, लेखक, मीडिया विशेषज्ञ— सर्वश्री देवी प्रसाद त्रिपाठी, सांसद, राज्यसभा, लेखक एवं विचारक प्रो. अभय कुमार दुबे, समाजविज्ञानी, मानविकी विश...
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Tue Dec 04, 2018 10:27 am
Forum: कविता
Topic: कविता की नदिया बहती है………. - महावीर उत्तरांचली
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कविता की नदिया बहती है………. - महावीर उत्तरांचली

शब्द कहें तू न रुक भइया कदम बढ़ाकर चल-चल-चल-चल कविता की नदिया बहती है करती जाए कल-कल-कल-कल कविता की नदिया बहती है………. काग़ज़ पर होती है खेती हर भाषा के शब्दों की उच्चारण हों शुद्ध यदि तो शान बढ़े फिर अर्थों की हिंदी-उर्दू के वृक्षों से तोड़ रहे सब फल-फल-फल-फल कविता की नदिया बहती है………. अ आ इ ई के अक...
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Tue Dec 04, 2018 10:23 am
Forum: गीत
Topic: अन्नदाताओं_को_समर्पित_गीत--अनुराग 'अतुल'
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अन्नदाताओं_को_समर्पित_गीत--अनुराग 'अतुल'

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Tue Dec 04, 2018 10:16 am
Forum: गज़ल
Topic: वह दिखाबे के लिए ही ---ठाकुर दास सिद्ध
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वह दिखाबे के लिए ही ---ठाकुर दास सिद्ध

https://scontent.fnag1-2.fna.fbcdn.net/v/t1.0-9/24293937_327590761054447_3773735430220584213_n.jpg?_nc_cat=110&_nc_eui2=AeHwEhu4qkJEHkecI-EpBBWMnSb_Sjet2ZQP2cuO43SaLBUCPoheOgX79QJtDLoA39YyXMDGmUZtG2Mp3SLA32Z_MHHMJhQc1wc5DV81Ldqd3A&_nc_ht=scontent.fnag1-2.fna&oh=d705de877f909382507ab3bd96a735e9&oe=5...
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Tue Dec 04, 2018 10:10 am
Forum: press news
Topic: बुलंदशहर में इंस्पेक्टर की नृंशस हत्या के लिए योगी सरकार जिम्मेदार- रिहाई मंच
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बुलंदशहर में इंस्पेक्टर की नृंशस हत्या के लिए योगी सरकार जिम्मेदार- रिहाई मंच

For Resistance Against Repression बुलंदशहर में इंस्पेक्टर की नृंशस हत्या के लिए योगी सरकार जिम्मेदार- रिहाई मंच सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में गठित की जाए एसआईटी गौरक्षकों की खुली चुनौती जो उनकी अराजकता को रोकेगा मारा जाएगा चाहे वो पुलिस ही हो हथियारबंद गौरक्षक सेनाओं को तत्काल प्रतिबंधित किया जाए गुण्...
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Sun Dec 02, 2018 3:23 pm
Forum: गज़ल
Topic: तेरे दिये जख्मों के सहारे जी लूँगा---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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तेरे दिये जख्मों के सहारे जी लूँगा---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png तेरे दिये जख्मों के सहारे जी लूँगा बात निकलेगी जब, जुबां को सी लूँगा दुआ माँगूँगा मरने की, जब न होगी कबूल , जहर जिंदगी की पी लूँगा दर्दमंदों से दूर फ़िरने वाले से वादा है मेरा अपने फ़िक्रे फ़न में हिस्सा तुमको भी दूँगा जिसकी फ़ुरकत ने इश्क की...
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Sun Dec 02, 2018 3:19 pm
Forum: गज़ल
Topic: तुम बिन जाऊँ तो कहाँ जाऊँ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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तुम बिन जाऊँ तो कहाँ जाऊँ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png तुम बिन जाऊँ तो कहाँ जाऊँ नसीमे1 जहाँ है खिजा2 कहाँ जाऊँ सुनता नहीं वक्त ,बयाने गम किसी का किसको अपनी फ़ुरकते3 दास्तां सुनाऊँ इन्सां, इन्सां का कद्र भूल गये दिल को जिगर से कहाँ मिलवाऊँ खीच लाया जल्वा-ए-दिल मुझको यहाँ मैं कब चाहा तुम दोनों के ...
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Sun Dec 02, 2018 3:15 pm
Forum: गज़ल
Topic: तुम छोड़ आये जहाँ,वो मेरी मंजिल नहीं है---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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तुम छोड़ आये जहाँ,वो मेरी मंजिल नहीं है---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png तुम छोड़ आये जहाँ, वो मेरी मंजिल नहीं है उसकी तबीयत आम है, जौहरे काबिल नहीं है लोग वहाँ आये बैठे, उठकर चले गये, मैं ढूँढता जिस महफ़िल को, वो यह महफ़िल नहीं है ता उम्र जिसकी यादों को सीने से लगाये रखा अब जाकर जाना,वह मेरे बहरे-मुहब्बत1की साहिल...
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Sun Dec 02, 2018 3:13 pm
Forum: गज़ल
Topic: तुम क्या खफ़ा हुए,जमाना खफ़ा हुआ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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तुम क्या खफ़ा हुए,जमाना खफ़ा हुआ---डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png तुम क्या खफ़ा हुए, जमाना खफ़ा हुआ गलत क्या हुआ, जो तुमसा दूसरा पैदा हुआ अदम1तक चर्चा गई तुम्हारी बेवफ़ाई की,तुम कहती हो, मालूम नहीं, कब जमीं से आसमां ज़ुदा हुआ शम-अ बुझती है तो धुआं उठता है,तुम्हारी नजर में जो शोला-ए-इश्क2 सियाहपोश3 न हुआ,तो ...
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Sun Dec 02, 2018 3:07 pm
Forum: गज़ल
Topic: गमे-दिल किससे कहे,कोई गमख्वार नहीं मिलता--डॉ. श्रीमती तारा सिंह
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गमे-दिल किससे कहे,कोई गमख्वार नहीं मिलता--डॉ. श्रीमती तारा सिंह

http://www.swargvibha.in/horizontalmenu/tara%20singh.png गमे-दिल किससे कहे, कोई गमख्वार1 नहीं मिलता दिल से दिल तो मिलता, दिलदार नहीं मिलता वो रोज आती है ख्यालों में,आँखों में रहती है तस्वीर बनकर ,हाथ बढ़ाता जब दौलते-बेदार2 नहीं मिलता उम्र भर हम अपनी किस्मत पर रोते रहे, बहारे उम्र के बागे जहां में ख...