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महाशिव –रात्रि एक मंगलकारी पर्व

 

 

शिव –रात्रि कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है . भारतीय शास्त्रों में यह तिथि विशेष महत्वपूर्ण है.भगवान शिव का स्थान हिन्दू –धर्म में सबसे ऊँचा है. ऐसे देवता जो सर्व शक्तिमान होते हुए भी संपत्ति और वैभव का सम्पूर्ण त्याग करते हैं. उनका ‘’तीसरा – नेत्र बड़ी से बड़ी शक्ति को जलाकर भष्म कर देता है परन्तु उनकी ये विभूति हमें प्रेरित करते हैं की अपनी तीसरी आँखें खोलो यानि विवेक की आँख खोलकर भविष्य को देखो .दिव्यदृष्टि से आनेवाले समय को निहारो ताकि जीवन व्यथित न हो.


‘’चन्द्रमा धारण करना’’ -------मस्तिष्क को संतुलन रखना .किसी भी मुसीबतों में धर्य द्वारा समस्या का समाधान करना. मन को स्थिर रखना ही,’’चन्द्रमा धारण करना’’कहलाता है .


‘’ पवित्र गंगा ‘’---------पवित्र गंगा का तात्पर्य ,ज्ञान की गंगा प्रवाहित करना,शुद्ध व पवित्र विचार को जीवन में समावेश कर लेना ,पवित्र गंगा का प्रतीक है .


‘’मरघट मुंडों की माला’’--------------मौत को हर-पल याद रखना क्योंकि मौत ही सत्य है जिसे हर हाल में अपनाना है .इस जलने वाली शरीर को उतने ही प्यार चाहिए जितने की जरुरत हो तो फिर गलत संस्कार और गन्दी विचार किसके लिए रखते हैं लोग .


‘’हीरा-मोती त्यागकर सर्प को गले लगाते हैं ,अमृत छोड़कर विष पीते हैं, आक-धतुरा खाते है ,बैल की सवारी करते हैं इत्यादि ये सभी चीजें शिव के स्वरुप का वर्णन करते है .हमें इस बात की शिक्षा देते हैं की प्रकृति का उपयोग करे तथा स्वार्थी ना बने .शिवजी का आदर्श बतलाता है कि मानव-जीवनकी सफलता इसी में है जिसमे व्यक्तिगत लाभ का विचार छोड़कर परोपकारी बने .भोलेनाथ की मनोदशा वैराग्य को दर्शाती है .अतिशय मोहमाया ना पाले,निर्लिप्त भाव से लोगो की सहायता करें .


शिव का अर्थ कल्याण होता है .इनके तत्वदर्शन को आदर्श समझकर अपने जीवन में उतारने से कभी अमंगल नहीं होता ,महाशिवरात्रि का वास्तविक उद्देश्य यही है . शिव के सनातन अंश अगर आत्मा से निकल जाये तो शरीर केवल ‘’शव‘’रह जाता है .आत्मा के रहते ही शरीर में सुन्दरता , आकर्षण व संबंधों में मधुरता की एहसास होती है .


शिवरात्रि का पर्व बोधोत्सव है .आत्मविचार करने की प्रेरणा देती है .सोई हुई आत्मा को जगाने का तथा दुर्गुण और दुर्व्यसन से दूर रहने का संकल्प लेने का व्रत है.जीवन चेतना जाग्रत करने का व्रत है . जीवनबोध के बिना जीवन का अँधेरा नहीं मिटता .शिव के साथ एकाकार हो जाना ही शिव पूजा है .


‘’रात्रि‘’ --------जो सदा आश्रय देने वाली होती है ,आनंददायिनी होती है .शिव से मिलने की रात्रि जिसमें शिव से व्रत ,उपासना के द्वारा मिलना होता है .इस मंगलकारी रात में भक्त यही कामना करते है की मेरे जीवन में कभी अंधकार न आये .सारा दिन पूजा –पाठ करके अपने पापों का प्रायश्चित करते है . शिवजी भी सच्चे भक्तों को वर देने के लिए मचल जाते है.

 


‘’हर-हर महादेव‘’ .

 

 

 

भारती दास

 

 

 

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